Bihar Polls: महागठबंधन को झारखंड मुक्ति मोर्चा का बड़ा झटका

Summary

बिहार के महागठबंधन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने INDIA गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। JMM ने अपने सहयोगियों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस से किनारा करते हुए छह प्रमुख सीमावर्ती निर्वाचन क्षेत्रों में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इस फैसले ने राजनीतिक…

Bihar Polls: महागठबंधन को झारखंड मुक्ति मोर्चा का बड़ा झटका

बिहार के महागठबंधन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने INDIA गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। JMM ने अपने सहयोगियों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस से किनारा करते हुए छह प्रमुख सीमावर्ती निर्वाचन क्षेत्रों में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इस फैसले ने राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है और महागठबंधन की योजनाओं को खतरे में डाल दिया है, जिससे NDA के पक्ष में समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है।

सीट-शेयरिंग वार्ता का विघटन

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में JMM के महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी ने अपने सहयोगियों, विशेष रूप से RJD और कांग्रेस के साथ कई दौर की चर्चाएँ की थीं। JMM ने उन सीटों पर दावा किया था जहां उसके कार्यकर्ता वर्षों से सक्रिय हैं और लगातार JDU-BJP गठबंधन के खिलाफ कार्य कर रहे हैं। हालांकि, कई चर्चाओं के बावजूद कोई सहमति नहीं बन पाई।

भट्टाचार्य ने कहा, “हमने महागठबंधन के सभी घटक दलों – RJD, कांग्रेस, और विशेष रूप से RJD के साथ संपर्क किया। हम हमेशा सहयोग की भावना से काम करते हैं, लेकिन जब हमारे साझेदार संवाद से दूर होते हैं, तो हमें अपनी राह खुद बनानी पड़ती है।”

अतीत की बलिदान, कम सम्मान

उन्होंने यह भी बताया कि 2019 के झारखंड विधानसभा चुनावों के दौरान, JMM ने RJD और कांग्रेस के लिए कई सीटें छोड़ी थीं, लेकिन इसके बदले में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला। यह घटनाक्रम JMM के लिए निराशाजनक रहा है और अब पार्टी ने अपने हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।

छह प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान

JMM ने चुनावी रणनीति के तहत छह निर्वाचन क्षेत्रों – धामदाहा, चकाई, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती से उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है। ये क्षेत्र झारखंड सीमा के निकट स्थित हैं और इनमें आदिवासी जनसंख्या की अच्छी खासी संख्या है। पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में उनकी संगठनात्मक शक्ति इतनी मजबूत है कि वे स्वतंत्र रूप से चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

तेजस्वी के साथ वार्ता का कोई परिणाम नहीं

सूत्रों के अनुसार, JMM के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि पार्टी ने पहले तेजस्वी यादव के साथ सीटों के प्रस्ताव पर चर्चा की थी, लेकिन कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण यह निर्णय लिया गया। यह स्थिति महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।

महागठबंधन के लिए झटका, NDA के लिए लाभ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM का यह कदम महागठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, खासकर सीमावर्ती और आदिवासी-प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में। इससे वोटों का विभाजन हो सकता है, जो NDA को लाभ पहुंचा सकता है। इस स्थिति का राजनीतिक प्रभाव चुनावों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

चुनाव की तारीखें

बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को आयोजित किए जाएंगे, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। JMM के इस निर्णय का महागठबंधन की रणनीति और सीटों के समीकरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जिससे आगामी दिनों में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।