Movie: मेनोपॉज पर बनी पहली फिल्म ‘मी नो पॉज मी प्ले’ का पोस्टर रिलीज

Summary

“मी नो पॉज मी प्ले” फिल्म का अनावरण: 18 अक्टूबर को आयोजित वर्ल्ड मेनोपॉज डे के अवसर पर डिजिफिल्मिंग और मिररो फिल्म्स ने अपनी आगामी फिल्म “मी नो पॉज मी प्ले” का पहला पोस्टर जारी किया। यह फिल्म पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय, ‘मेनोपॉज’, को बड़े पर्दे पर पेश करने का…

Movie: मेनोपॉज पर बनी पहली फिल्म ‘मी नो पॉज मी प्ले’ का पोस्टर रिलीज

“मी नो पॉज मी प्ले” फिल्म का अनावरण: 18 अक्टूबर को आयोजित वर्ल्ड मेनोपॉज डे के अवसर पर डिजिफिल्मिंग और मिररो फिल्म्स ने अपनी आगामी फिल्म “मी नो पॉज मी प्ले” का पहला पोस्टर जारी किया। यह फिल्म पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय, ‘मेनोपॉज’, को बड़े पर्दे पर पेश करने का साहसिक प्रयास करती है। यह भारत की पहली हिंदी फीचर फिल्म बनकर उभरेगी, जो मेनोपॉज की चुनौतियों और अनुभवों को गहराई से प्रस्तुत करेगी। यह फिल्म महिलाओं की स्थिति, उनकी भावनाओं और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करती है, और समाज में चल रहे कई पूर्वाग्रहों को तोड़ने का प्रयास करती है। इस फिल्म का उद्देश्य न केवल मनोरंजन करना है, बल्कि महिलाओं के अनुभवों और संघर्षों के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। फिल्म “मी नो पॉज मी प्ले” 28 नवंबर, 2025 को रिलीज होने वाली है।

मेनोपॉज पर गहराई से चर्चा

भारतीय सिनेमा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि यह पहली हिंदी फिल्म है जो मेनोपॉज जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा कर रही है। मेनोपॉज, जो कि हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है, इसके बावजूद इस पर खुलकर बात नहीं की जाती है। फिल्म का उद्देश्य इस अवधि के दौरान महिलाओं को होने वाले भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक संघर्षों पर प्रकाश डालना है। इसके साथ ही, यह सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ने और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास करती है। फिल्म “मी नो पॉज मी प्ले” प्रसिद्ध लेखक और फिल्म निर्माता मनोज कुमार शर्मा द्वारा लिखित उसी नाम की किताब पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन समर के. मुखर्जी ने किया है, और इसके पटकथा लेखक शकील कुरैशी और मनोज कुमार शर्मा हैं। फिल्म की छायांकन अकरम खान ने किया है।

मनोरंजन नहीं, जागृति का माध्यम- समर के. मुखर्जी

फिल्म की कहानी वास्तविक जीवन के अनुभवों से प्रेरित है और यह स्वीकृति, आत्म-खोज और सशक्तिकरण के विषय पर सार्थक संवाद आरंभ करने का प्रयास करती है। फिल्म के उद्देश्य के बारे में निर्देशक समर के. मुखर्जी ने कहा, “मेनोपॉज को अक्सर एक महिला के जीवन का एक ‘खामोश अध्याय’ माना जाता है। लोग इस पर चर्चा करने से कतराते हैं। ‘मी नो पॉज मी प्ले’ के माध्यम से हम इस बातचीत को सामान्य बनाना चाहते हैं, ताकि महिलाएं अपने अनुभवों को साझा कर सकें और उनकी भावनात्मक शक्ति का जश्न मनाया जा सके। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि एक जागृति भी है।”

सशक्त महिलाओं की कहानी

इस फिल्म में काम्या पंजाबी, दीपशिखा नागपाल, सुधा चंद्रन, और एमी मिसोब्बा जैसे प्रमुख कलाकार हैं। ये सभी फिल्म में ऐसी महिलाओं का किरदार निभा रही हैं, जो ताकत, स्वीकृति और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ते हुए बदलाव और लचीलेपन के माध्यम से महिला के सफर के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। इसके साथ ही, यह फिल्म रूढ़िवादिता में जकड़े समाज से मासिक धर्म के बारे में चुप्पी को तोड़ने और बेहतर समझ की मांग करती है। फिल्म में मनोज कुमार शर्मा, करण छाबड़ा, और अमन वर्मा जैसे अन्य महत्वपूर्ण किरदार भी हैं, जो कहानी को और भी गहराई देते हैं।

काम्या पंजाबी का लीड रोल

काम्या पंजाबी, जो इस फिल्म में लीड किरदार निभा रही हैं, ने अपनी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “जब मैंने पहली बार फिल्म ‘मी नो पॉज मी प्ले’ की स्क्रिप्ट सुनी, तो मैं इससे बेहद प्रभावित हुई। मेनोपॉज एक ऐसी अवस्था है, जिसका अनुभव हर महिला अपने जीवन में करती है, लेकिन इस पर खुलकर बात नहीं होती। मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसी फिल्म का हिस्सा हूं, जो इस अनचाही चुप्पी को तोड़ती है और महिलाओं को गर्व और आत्मविश्वास के साथ खुद को अपनाने के लिए प्रेरित करती है। इस किरदार ने मुझे एक कलाकार के तौर पर चुनौती दी है, लेकिन इसने मुझे एक महिला के रूप में भी सजग और जागरूक बनाया है।”

इस फिल्म के लेखक और निर्माता मनोज कुमार शर्मा ने कहा, “मेनोपॉज एक स्वाभाविक अवस्था है, फिर भी हमारे समाज में इसे एक कलंक के रूप में देखा जाता है। इस फिल्म के माध्यम से हम इस अवस्था के दौरान महिलाओं द्वारा प्रदर्शित भावनात्मक शक्ति को सहानुभूति के साथ प्रस्तुत करना चाहते हैं, साथ ही इसके प्रति समझ और सम्मान बढ़ाने का प्रयास भी कर रहे हैं।”

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