अभिनेता जितेंद्र कुमार वर्तमान में जी 5 की फिल्म ‘भागवत चैप्टर 1: राक्षस’ में अपने नेगेटिव अवतार के लिए सराहना प्राप्त कर रहे हैं। इस फिल्म और अपने करियर के बारे में उन्होंने उर्मिला कोरी के साथ कई दिलचस्प बातें साझा की हैं, जो उनके अभिनय की गहराइयों और चुनौतियों को उजागर करती हैं।
आपकी लोकप्रिय इमेज से अलग जाकर भागवत को ‘हां’ कहना आसान था?
जितेंद्र ने बताया कि उनका किरदार नेगेटिव है, लेकिन उन्होंने फिल्म को हां नहीं किया था क्योंकि यह एक खलनायक की भूमिका है। बल्कि, उन्होंने इसकी कहानी को काफी पसंद किया। उन्होंने कहा, “जब मुझे स्क्रिप्ट सुनाई गई, तो वह पहली बार में ही मुझे आकर्षित कर गई। यह कहानी काफी एंगेजिंग थी। निश्चित तौर पर मैंने ऐसा किरदार पहले कभी नहीं किया था और इसको लेकर मैं उत्साहित था। लेकिन मुख्य वजह फिल्म की कहानी ही थी।”
इस किरदार ने आपके सामने किस प्रकार की चुनौती पेश की?
जितेंद्र ने कहा कि हर किरदार उनके लिए एक नया अनुभव होता है। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो मेरे लिए जितने भी किरदार आते हैं, वे मेरे लिए एलियन होते हैं। हर किरदार में चुनौतियाँ होती हैं। ‘पंचायत’ का किरदार भी मेरे लिए उतना ही मुश्किल था, जितना कि यह किरदार। लोग सोचते हैं कि पंचायत का किरदार करना आसान था, लेकिन ऐसा नहीं है। हर किरदार की अपनी चुनौतियाँ होती हैं, और मैं अपने निर्देशकों के विजन और स्क्रिप्ट को ध्यान में रखकर अपने किरदार को निभाता हूं।”
क्या आप साइनाइड मोहन की कहानी से परिचित थे?
इस पर जितेंद्र ने कहा, “हाँ, जब यह खबर अखबार में आई थी, तब मैंने इसे पढ़ा था। बेंगलुरु में एक सीरियल किलर था जिसने कई महिलाओं को अपना शिकार बनाया था। लेकिन इस फिल्म के लिए मुझे उस केस को फिर से याद करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। निर्देशक ने मुझे कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। मैंने उनसे पूछा था, तो उन्होंने कहा कि तुम बस स्क्रिप्ट पढ़ो।”
क्या विजय वर्मा की वेब सीरीज ‘दहाड़’ भी इसी पर आधारित थी?
जितेंद्र ने उत्तर दिया, “हाँ, मैंने इसके बारे में सुना है, लेकिन अपने व्यस्त शेड्यूल के कारण मैं वह सीरीज नहीं देख सका, इसलिए विजय वर्मा का प्रदर्शन भी नहीं देख पाया। लेकिन निर्देशक ने बताया कि हमारी फिल्म में कई बातें उस सीरीज से काफी अलग और रियल हैं। साइनाइड मोहन ने अपना केस खुद अदालत में लड़ा था, जो कि किसी भी फिल्म या सीरीज में अब तक नहीं दिखाया गया है, लेकिन हमारी फिल्म में इसे प्रमुखता से दिखाया गया है।”
क्या आपको अपने करियर में टाइपकास्ट होने का डर नहीं है?
जितेंद्र ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, “मैं खुद को लकी मानता हूँ कि मुझे अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का मौका मिलता है। मुझे टाइपकास्ट नहीं किया जाता। भले ही मैं ‘पंचायत’ का तीसरा या चौथा सीजन करूं, लेकिन हर बार सिचुएशन, किरदार और उसके एक्सप्रेशन अलग होते हैं। मेरे अगले प्रोजेक्ट्स में भी मैं एक नए अंदाज में नजर आऊंगा। इसे मैं अपनी मेहनत नहीं, बल्कि किस्मत कहूंगा जो मुझे ऐसे मौके मिल रहे हैं।”
क्या आप निर्माता-निर्देशकों से काम के लिए संपर्क करते हैं?
जितेंद्र ने कहा, “हाँ, जिन लोगों के काम को मैं पसंद करता हूँ, उनसे संपर्क करता हूँ। लेकिन मैं फोन पर नहीं, बल्कि किसी इवेंट या जगह पर उनसे मिलकर अपनी ख्वाहिश जाहिर करता हूँ कि मैं उनके साथ काम करना चाहता हूँ।”
क्या आप ओटीटी के स्टार होने के नाते थिएटर रिलीज फिल्मों को मिस करते हैं?
जितेंद्र ने इस पर कहा, “मेरी कोशिश हमेशा अच्छा काम करने की होती है। मेरे लिए माध्यम मायने नहीं रखता। एक अभिनेता के रूप में हमें हर माध्यम में काम करना चाहिए, तभी भेदभाव करने वाली लाइन्स कमजोर होंगी।”
क्या आपको लगता है कि एक अभिनेता के लिए आठ घंटे की शिफ्ट की मांग उचित है?
जितेंद्र ने इस पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि अगर किसी एक्टर को आठ घंटे काम करना है, तो वह अपनी बात रख सकता है। इसमें कोई बुराई नहीं है। यह एक स्वस्थ संवाद होना चाहिए, जो काम के माहौल को सकारात्मक बनाए।”
