Protest: जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक का ऐलान, 20 जुलाई को करेंगे संसद मार्च

Summary

दिल्ली की सड़कों पर चल रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक भव्य और शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह मार्च संसद के आगामी मानसून…

सोनम वांगचुक का दिल्ली में बड़ा ऐलान: 20 जुलाई को संसद तक निकालेंगे शांतिपूर्ण मार्च

दिल्ली की सड़कों पर चल रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक भव्य और शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह मार्च संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार को छात्रों की समस्याओं और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों के प्रति सचेत करना है। वांगचुक ने सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं और जागरूक नागरिकों से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

सोनम वांगचुक का अनशन अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि उनके साथ जुड़े अन्य प्रदर्शनकारियों का अनशन 19 दिनों से जारी है। लगातार जारी इस भूख हड़ताल के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है, और उनके सहयोगियों के अनुसार अब तक उनका वजन करीब 7 किलोग्राम घट चुका है। बावजूद इसके, वांगचुक का हौसला अडिग है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों की है जिनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह मार्च पूरी तरह से अहिंसक और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहेगा।

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अनशन स्थल पर बिगड़ी तबीयत: जेएनयू छात्र अस्पताल में भर्ती

आंदोलन के दौरान बुधवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब अनशन पर बैठे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र ऋषिकेश की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पिछले 11 दिनों से अन्न-जल त्यागकर संघर्ष कर रहे ऋषिकेश को गंभीर कमजोरी और सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की एक टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। इस घटना ने आंदोलनकारी छात्रों की चिंता को और बढ़ा दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने साथियों के बलिदान और संघर्ष को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

आंदोलन की मुख्य मांगें और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • परीक्षा प्रणाली में सुधार: प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और अनियमितताओं पर रोक लगाना।
  • पारदर्शिता: भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून बनाना।
  • छात्रों के भविष्य की सुरक्षा: आत्महत्या करने वाले छात्रों के प्रति संवेदना रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना।
  • लद्दाख और पर्यावरण संरक्षण: लद्दाख के पहाड़ों और भारत की नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाना।

लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे युवा

सोनम वांगचुक का मानना है कि यदि लोग आज नहीं जागे, तो भविष्य में इसके परिणाम और भी भयावह होंगे। उन्होंने अपने एक संदेश में कहा, “मेरा अनशन तोड़ने के संदेश भेजने के लिए मैं आप सभी का आभारी हूं, लेकिन मेरा अनशन तोड़ना उन 20 छात्रों की जान नहीं बचा सकता जिन्होंने आत्महत्या की है, और न ही यह लद्दाख के पहाड़ों को बचा पाएगा।” वांगचुक का यह आह्वान अब एक जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुट रही भीड़ और छात्रों का बढ़ता समर्थन इस बात का संकेत है कि युवा वर्ग अब शिक्षा और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

फिलहाल, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। सरकार की ओर से अभी तक किसी ठोस आश्वासन के न मिलने के कारण आंदोलनकारियों में नाराजगी है। 20 जुलाई का संसद मार्च इस आंदोलन का एक निर्णायक बिंदु साबित हो सकता है। सुरक्षा बलों की तैनाती और दिल्ली पुलिस की ओर से संभावित दिशानिर्देशों के बीच, प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन बनाए रखने का संकल्प लिया है। वांगचुक ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि हमारा उद्देश्य सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराना है, न कि किसी प्रकार की अराजकता फैलाना। अब देखना यह होगा कि सरकार इस शांतिपूर्ण मार्च और छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।