दिल्ली के रोहिणी में भीषण हादसा: निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत ढही, 4 लोगों की मौत से मचा कोहराम
राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। रोहिणी सेक्टर-16 में स्थित एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई। इस भयावह घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मलबे के नीचे अभी भी कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। शाम करीब 4:30 बजे जैसे ही इमारत गिरने की खबर मिली, दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और दिल्ली नगर निगम (MCD) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। इनके साथ ही राजस्व विभाग, एंबुलेंस सेवा और बिजली विभाग की टीम ने मोर्चा संभाल लिया। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की और जनहानि को टाला जा सके।
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मृतकों और घायलों की स्थिति
बचाव दल ने मलबे से चार लोगों को बाहर निकाला, जिनमें से 42 वर्षीय राम किशोर को अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है। घायलों में 35 वर्षीय रवि, जो प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का काम कर रहे थे, और 32 वर्षीय सद्दाम शामिल हैं। सद्दाम के हाथ और पैर में गंभीर फ्रैक्चर आया है, जिनका इलाज बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सा अधिकारी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उन्हें हर संभव चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस हादसे ने दिल्ली के सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का आरोप है कि राजधानी में अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर कोई लगाम नहीं है। लोगों का कहना है कि डीडीए, एमसीडी और अग्निशमन विभाग जैसी संस्थाएं समय रहते निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण नहीं करतीं। यदि इन इमारतों की समय-समय पर जांच की जाती, तो शायद आज इतने लोगों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।
- अवैध निर्माण: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिना उचित मंजूरी और सुरक्षा मानकों के निर्माण कार्य जारी था।
- निरीक्षण की कमी: संबंधित विभागों द्वारा जमीनी स्तर पर निगरानी का अभाव।
- सुरक्षा नियमों की अनदेखी: निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों और मानकों की भारी कमी।
हादसे की संभावित वजह: क्या ड्रिलिंग बनी काल?
नगर निगम (MCD) के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस भवन का निर्माण ‘सरल योजना’ के तहत स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के आधार पर किया गया था। प्रत्येक यूनिट का क्षेत्रफल मात्र 26 वर्ग मीटर था और हादसे के समय फिनिशिंग का काम चल रहा था। निगम अधिकारियों का मानना है कि प्लंबिंग कार्य के दौरान कॉलम और बीम में की गई ड्रिलिंग और छेद इमारत के अचानक गिरने का मुख्य कारण हो सकते हैं। इससे इमारत का ढांचा कमजोर हो गया और वह अपना भार सहन नहीं कर सकी।
डीडीए का स्पष्टीकरण और भविष्य की चुनौतियां
घटना के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि जिस क्षेत्र में यह हादसा हुआ, उसे 2016 में ही डी-नोटिफाई कर दिया गया था। इसका अर्थ यह है कि उस क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव अब स्थानीय निकाय के पास है। वहीं, दूसरी ओर एमसीडी के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 1 अप्रैल से 30 जून तक एक विशेष सर्वे अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया, जिनमें से 19 इमारतों को ‘खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है।
फिलहाल, घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे को पूरी तरह हटाने में अभी और समय लग सकता है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों तथा मालिकों की भूमिका की भी गहनता से छानबीन की जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में सुरक्षित आवास और निर्माण मानकों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।





