रायपुर में धूमधाम से मना ‘जोहार जगन्नाथ’ उत्सव, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मनोकामना रथ को दिखाई हरी झंडी
राजधानी रायपुर के हृदय स्थल कोतवाली चौक स्थित प्रसिद्ध अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स (एटी पैलेस) में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के पावन अवसर पर एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम ‘जोहार जगन्नाथ’ का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भगवान जगन्नाथ के मनोकामना रथ को हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का वातावरण देखने को मिला।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि “जोहार जगन्नाथ” केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह प्रभु जगन्नाथ के प्रति अगाध भक्ति, आस्था और सेवा का एक पवित्र अभियान है। उन्होंने कहा कि यह मनोकामना रथ श्रद्धालुओं की प्रार्थनाओं को सीधे प्रभु के श्रीचरणों तक पहुँचाने का एक अनूठा माध्यम बनेगा। साथ ही, पुरी धाम से विशेष रूप से लाया गया महाप्रसाद भी जन-जन तक पहुँचाया जाएगा, जिससे समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार हो।
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साव ने भगवान श्री जगन्नाथ से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और प्रदेशवासियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य आरती से गूंजा एटी पैलेस
एटी पैलेस के प्रांगण में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की प्रतिमाओं की स्थापना अत्यंत विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। इस पावन अनुष्ठान में संस्था के चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया, उनकी धर्मपत्नी मंजू बरड़िया और पूरे बरड़िया परिवार ने सम्मिलित होकर महाआरती की। इस दौरान कंपनी के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी भक्तिभाव में डूबे नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों के साथ एक सार्थक संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें संस्था के पदाधिकारियों ने ‘जोहार जगन्नाथ’ कार्यक्रम के उद्देश्यों, ज्वेलरी व्यापार की वर्तमान स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की। पत्रकारों ने भी इस आयोजन को समाज और संस्कृति के मेल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स: सात दशकों का अटूट विश्वास
संस्था के चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया ने अपनी गौरवशाली यात्रा को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1957 में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के शुभ दिन ही अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स की नींव रखी गई थी। आज, भगवान की कृपा और ग्राहकों के भरोसे के चलते यह संस्थान अपने 70वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
- 70 वर्षों की विरासत: 1957 से ग्राहकों का भरोसा और गुणवत्ता का प्रतीक।
- सामाजिक सरोकार: व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक संरक्षण में सक्रिय भूमिका।
- आध्यात्मिक जुड़ाव: ‘जोहार जगन्नाथ’ के माध्यम से श्रद्धालुओं की सेवा का संकल्प।
रील प्रतियोगिता और आकर्षक पुरस्कारों का मौका
डायरेक्टर निकेश बरड़िया ने बताया कि बदलते दौर में सोना आज भी निवेश का सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है। उन्होंने बताया कि आगामी 16 जुलाई तक श्रद्धालु एटी पैलेस में आकर अपनी मनोकामनाएं लिख सकते हैं और पुरी से आए महाप्रसाद को प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, युवाओं के लिए एक विशेष ‘रील प्रतियोगिता’ भी आयोजित की जा रही है।
इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को भगवान जगन्नाथ या एटी ज्वेलर्स से संबंधित विषय पर रील बनाकर सोशल मीडिया हैंडल @atjewels.in के साथ कोलेबोरेट (Collab) करना होगा। सबसे अधिक लाइक्स और शेयर्स पाने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 15,000, 11,000 और 5,100 रुपये के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।
मीडिया संवाद और म्यूजिकल तंबोला का आनंद
मीडिया संवाद सत्र के पश्चात उपस्थित पत्रकारों और अतिथियों के लिए एक मनोरंजक ‘म्यूजिकल तंबोला’ का आयोजन किया गया, जिसने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया ने सभी मीडिया कर्मियों, गणमान्य अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रदेश की जनता से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में एटी पैलेस पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें और अपनी मनोकामनाएं प्रभु के समक्ष रखें।
