सुप्रीम कोर्ट का फैसला: Vodafone Idea के लिए राहत
नई दिल्ली: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने Vodafone Idea के लिए एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए केंद्र को समायोजित सकल राजस्व (AGR) के 9,450 करोड़ रुपये के बकाया पर पुनर्विचार करने की अनुमति दी है। यह निर्णय उस समय आया है जब यह टेलीकॉम कंपनी लगातार घाटे में चल रही है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला संघ की नीति के अंतर्गत आता है।
20 करोड़ उपभोक्ताओं का ध्यान
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह निर्णय 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। टेलीकॉम क्षेत्र में Vodafone Idea की स्थिति को देखते हुए, न्यायालय ने इस कंपनी के लिए राहत की आवश्यकता को समझा। यह कदम निश्चित रूप से उन लाखों ग्राहकों की भलाई में सहायक होगा जो Vodafone Idea की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।
2019 का ऐतिहासिक निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए केंद्र की AGR की परिभाषा को मान्यता दी थी, जिसके तहत 92,000 करोड़ रुपये के बकाया वसूलने के लिए कहा गया था। यह निर्णय Vodafone और भारती एयरटेल जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ था।
Vodafone का नया मामला
Vodafone का नवीनतम याचिका AGR के 9,450 करोड़ रुपये के नए बकाया के संबंध में है, जिसे दूरसंचार विभाग ने उठाया है। याचिका में यह कहा गया है कि इस मांग का एक बड़ा हिस्सा 2017 से पहले का है, जिसे पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा निपटाया जा चुका है। इस संदर्भ में, Vodafone ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है।
सरकार की भूमिका और बदलाव
भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में बताया कि “इस मामले की परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है” क्योंकि सरकार ने Vodafone में पूंजी का निवेश किया है। उन्होंने कहा, “सरकार का हित सार्वजनिक हित है। यदि इस कंपनी को नुकसान होता है, तो यह उपभोक्ताओं के लिए समस्याएं उत्पन्न करेगा।”
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केंद्र इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने के लिए इच्छुक है। “सरकार भी पुनर्विचार करने और उचित निर्णय लेने के लिए तैयार है, यदि न्यायालय अनुमति देता है। हम देखते हैं कि सरकार के पुनर्विचार में कोई बाधा नहीं है। हम स्पष्ट करते हैं कि यह एक नीतिगत मामला है, इसलिए संघ को ऐसा करने से क्यों रोका जाए,” शीर्ष अदालत ने कहा।
AGR की परिभाषा और विवाद
AGR एक शुल्क-शेयरिंग तंत्र को संदर्भित करता है, जिसके तहत टेलीकॉम ऑपरेटरों को अपनी आय का एक हिस्सा केंद्र सरकार के साथ लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में साझा करना होता है। टेलीकॉम कंपनियों और केंद्र के बीच AGR की परिभाषा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। जबकि टेलीकॉम दिग्गजों ने जोर दिया कि AGR केवल मुख्य सेवाओं पर आधारित होना चाहिए, केंद्र ने तर्क किया कि इसमें टेलीकॉम कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली गैर-टेलीकॉम सेवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय Vodafone Idea के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिसमें न केवल कंपनी की आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना है, बल्कि इसके 20 करोड़ ग्राहकों के हितों की भी रक्षा होगी। यह देखते हुए कि टेलीकॉम क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, यह निर्णय अन्य कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है कि कैसे सरकारी नीतियों का पुनर्विचार किया जा सकता है।