Auto: भारत के ऑटो सौदों में तिमाही 3 2025 में 4.6 अरब डॉलर की वृद्धि

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भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में मर्जर और अधिग्रहण का उभरता ट्रेंड भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में मर्जर और अधिग्रहण की गतिविधियों में वृद्धि नई दिल्ली: भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र में जुलाई-सितंबर 2025 (Q3) की अवधि में 30 लेनदेन के साथ $4.6 अरब का सौदा मूल्य दर्ज किया गया है, जो एक साल में सबसे मजबूत तिमाही के…

Auto: भारत के ऑटो सौदों में तिमाही 3 2025 में 4.6 अरब डॉलर की वृद्धि



भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में मर्जर और अधिग्रहण का उभरता ट्रेंड

भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में मर्जर और अधिग्रहण की गतिविधियों में वृद्धि

नई दिल्ली: भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र में जुलाई-सितंबर 2025 (Q3) की अवधि में 30 लेनदेन के साथ $4.6 अरब का सौदा मूल्य दर्ज किया गया है, जो एक साल में सबसे मजबूत तिमाही के रूप में उभरा है। यह जानकारी बुधवार को एक रिपोर्ट में साझा की गई।

इस वृद्धि का मुख्य कारण Tata Motors द्वारा $3.8 अरब में Iveco S.P.A. का अधिग्रहण है, जिसने Q3 2025 में कुल मर्जर और अधिग्रहण (M&A) मूल्य का 95 प्रतिशत हिस्सा बना लिया। ग्रांट थॉर्नटन भारत की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यह तिमाही वैश्विक विस्तार, इलेक्ट्रिककरण और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्संयोजन की रणनीतिक दिशा दिखाती है।

टाटा मोटर्स का अधिग्रहण और इसके प्रभाव

टाटा मोटर्स का यह बड़ा अधिग्रहण न केवल लेनदेन के मूल्य में वृद्धि का कारण बना, बल्कि इसने पूरे ऑटोमोटिव क्षेत्र में उत्साह भी पैदा किया। इस तिमाही में मर्जर और अधिग्रहण की गतिविधियाँ स्थिर रहीं, लेकिन टाटा मोटर्स के अधिग्रहण के चलते कुल मूल्य में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिली।

रिपोर्ट में बताया गया है कि M&A गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा सीमा पार के विलय और अधिग्रहण से संबंधित है। वहीं, निजी इक्विटी (PE) का रुचि भी मजबूत बनी हुई है, विशेषकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बेड़े के इलेक्ट्रिककरण और मोबिलिटी-एज़-ए-सर्विस (MaaS) जैसे तकनीकी-सक्षम क्षेत्रों में।

आंकड़े और विशेषताएँ

Q3 में मर्जर और अधिग्रहण की गतिविधियों में कुल 7 सौदों का रिकॉर्ड बना, जिनका मूल्य $4.1 अरब था। यह पिछले तिमाही के मुकाबले मूल्य में 1,234 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सीमा पार के लेनदेन ने कुल लेनदेन का 71 प्रतिशत हिस्सा और मूल्य का 99 प्रतिशत हिस्सा बनाया।

पार्किंग में निजी इक्विटी की गतिविधियों में 23 सौदों का समावेश था, जिनका कुल मूल्य $531 मिलियन था। हालांकि, इस तिमाही में मूल्य में 17 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस बीच, 70 प्रतिशत सौदे $10 मिलियन से कम के थे, जो दर्शाता है कि छोटे सौदों में वृद्धि हो रही है।

MaaS क्षेत्र में निवेश का बढ़ता रुझान

मोबिलिटी-एज़-ए-सर्विस (MaaS) ने निजी इक्विटी सौदों में प्रमुखता बनाए रखी है, जो कुल PE मूल्य का लगभग 80 प्रतिशत है। यह संकेत करता है कि निवेशक इस क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को लेकर कितने गंभीर हैं।

इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) द्वारा इलेक्ट्रिक बस ऑपरेटरों में $137 मिलियन का निवेश किया गया, जिसने शहरी इलेक्ट्रिककरण और बहु-मोडल परिवहन बुनियादी ढांचे में निवेशकों के विश्वास को और मजबूत किया।

सार्वजनिक बाजार की गतिविधियाँ और भविष्य की संभावनाएँ

Q3 2025 में सार्वजनिक बाजार की गतिविधियाँ अपेक्षाकृत सुस्त रहीं, जिसमें कोई प्रमुख IPO या QIP दर्ज नहीं किया गया। फिर भी, निवेशकों की निगाहें 2026 में होने वाले Toyota के IPO पर हैं, जो निवेश प्रवाह को पुनर्जीवित करने और क्षेत्रीय रुचि को बढ़ाने की उम्मीद जताती है।

इस प्रकार, भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में मर्जर और अधिग्रहण की गतिविधियाँ न केवल मजबूत हो रही हैं, बल्कि यह भविष्य में भी निवेशक और उद्योग के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकती हैं। यह रिपोर्ट निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है कि कैसे यह क्षेत्र विकसित हो रहा है और किस दिशा में जा रहा है।


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