भारतीय शेयर बाजार में कमाई आधारित सुधार की उम्मीदें
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में कमाई आधारित सुधार की उम्मीदें जगी हैं, क्योंकि साम्वत 2082 का प्रारंभ 21 अक्टूबर को होने जा रहा है। पीएल कैपिटल की चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक, अमीषा वोरा ने कहा है कि आने वाला वर्ष निवेशकों के लिए भारत के अगले विकास चक्र में भाग लेने का एक सुनहरा अवसर प्रस्तुत करता है, जो कि कॉर्पोरेट कमाई में सुधार और व्यापक आर्थिक विस्तार से प्रेरित होगा।
वोरा ने कहा, “जैसे ही हम साम्वत 2082 में प्रवेश कर रहे हैं, भारतीय बाजारों में धीरे-धीरे आशावाद लौट रहा है। बीता हुआ वर्ष निवेशकों की धैर्य की परीक्षा ले गया, जिसमें भारत मजबूत घरेलू मूलभूत तत्वों के बावजूद वैश्विक समकक्षों से पीछे रह गया।” साम्वत 2082 का आगाज 21 अक्टूबर को होगा, और हिंदू कैलेंडर में विक्रम साम्वत वर्ष की शुरुआत के प्रतीकात्मक मुहूर्त सत्र का आयोजन किया जाएगा।
आर्थिक सुधार और विकास के संकेत
वोरा ने structural reforms, जीएसटी 2.0 का कार्यान्वयन, आयकर में छूट, और सहायक नीति रुख को विकास के कारकों के रूप में उजागर किया है जो तरलता की स्थितियों को भी आसान बनाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत का जीडीपी वित्तीय वर्ष 26 में लगभग 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो इसे वैश्विक स्तर पर सबसे तेज विकास दरों में शामिल करता है। यह भारत की स्थायी विकास कथा को रेखांकित करता है।
उन्हें यह भी बताया कि मूल्यांकन उचित हैं, कमाई में कटौतियां ज्यादातर नीचे आ चुकी हैं, और घरेलू प्रवाह असाधारण रूप से मजबूत बने हुए हैं, जबकि विदेशी निवेशक सतर्क बने हुए हैं। यह भारतीय शेयरों के लिए नए साम्वत में बेहतर प्रदर्शन करने का अनुकूल वातावरण बनाता है, ऐसा वोरा ने पूर्वानुमान किया।
Nifty 50 कंपनियों की औसत कमाई में वृद्धि
विश्लेषकों ने भविष्यवाणी की है कि Nifty 50 कंपनियों की औसत कमाई वित्तीय वर्ष 26 में 8 प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 27 में 16 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। यह वृद्धि नीतिगत उपायों, मैक्रो स्थिरता, और परिपक्व घरेलू निवेशक आधार द्वारा प्रेरित होगी।
मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) ने कहा है कि वे BFSI, पूंजी बाजार, उपभोग, विनिर्माण, और डिजिटल क्षेत्रों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव और धीमी वृद्धि जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, विश्लेषकों ने यह भी नोट किया कि भारत एक मैक्रो-स्थिर, तरलता से भरपूर, और नीति समर्थित अर्थव्यवस्था के रूप में उभरता है।
आर्थिक स्थिरता और तरलता का महत्व
भारत की आर्थिक स्थिरता और तरलता के संदर्भ में, अमीषा वोरा ने कहा कि यह समय निवेशकों के लिए अनुकूल है। उन्होंने कहा कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बावजूद, भारतीय बाजार में एक मजबूत आधार है। यह संकेत देता है कि भारतीय शेयर बाजार नए साम्वत में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
वोरा ने आगे कहा कि भारतीय बाजार में निवेश का यह समय उन सभी के लिए आदर्श है जो दीर्घकालिक लाभ की तलाश में हैं। साम्वत 2082 में निवेशक न केवल आर्थिक विकास का लाभ उठा सकेंगे, बल्कि एक स्थिर और विकासशील बाजार का हिस्सा भी बनेंगे।
निष्कर्ष
साम्वत 2082 के आगमन के साथ, भारतीय शेयर बाजार में एक नई शुरुआत हो सकती है। यदि कंपनियों की कमाई में सुधार होता है और अर्थव्यवस्था में मजबूती आती है, तो यह निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। भारतीय बाजार का यह सकारात्मक रुख न केवल घरेलू बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
इस प्रकार, आने वाला वर्ष भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जिसमें निवेशकों को सही समय पर सही निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।
