चक्रवात ‘मोंथा’ का अलर्ट: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश की संभावना
नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और आस-पास के तटीय क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। चक्रवात ‘मोंथा’ बंगाल की खाड़ी में तेजी से ताकतवर हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तूफान मंगलवार की शाम या रात को तट से टकरा सकता है, जिससे तेज़ हवाएँ और भारी बारिश आएगी।
आईएमडी भुवनेश्वर की निदेशक डॉ. मनोरमा मोहंती ने बताया कि यह प्रणाली 28 अक्टूबर की सुबह तक और मजबूत होने की संभावना है। उनके अनुसार, चक्रवात का लैंडफॉल मचलीपट्नम और कालीगापटनम के बीच, काकिनाडा के पास होने की संभावना है। उन्होंने चेतावनी दी है कि लैंडफॉल के समय चक्रवात की तीव्रता गंभीर चक्रवातीय तूफान की होगी, जिसमें हवाओं की गति 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है।
ओडिशा में भारी बारिश की संभावना
चक्रवात के प्रभाव के कारण ओडिशा के कई जिलों में अगले दो से तीन दिनों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। प्रशासन ने कमजोर क्षेत्रों की निगरानी के लिए विशेष ध्यान रखा है, विशेषकर निम्नलिखित तटीय बेल्ट में।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मजीhi ने कहा कि राज्य प्रशासन ने सभी संभावित परिदृश्यों के लिए तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। उन्होंने बताया कि हालांकि चक्रवात का मुख्य प्रभाव आंध्र प्रदेश पर होगा, फिर भी ओडिशा के कई जिलों में भी व्यवधान हो सकता है।
- मुख्यमंत्री ने कहा, “हम बड़े नुकसान की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, फिर भी हर एहतियात बरती गई है।”
- उन्होंने बताया कि मंगलवार की सुबह एक आपातकालीन समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी ताकि विकसित स्थिति का आकलन किया जा सके और किसी भी खतरे का त्वरित उत्तर दिया जा सके।
तैयारी और सुरक्षा उपाय
एनडीआरएफ और दोनों राज्यों की आपदा प्रतिक्रिया इकाइयाँ बचाव टीमों के साथ तैयार हैं। मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी गई है, और यदि स्थिति बिगड़ती है तो निकासी योजनाएँ तैयार हैं।
चक्रवात ‘मोंथा’ तट के करीब आ रहा है, और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि तूफान पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। निवासियों को गंभीर मौसम के दौरान घर के अंदर रहने की चेतावनी दी गई है और कई चेतावनियाँ जारी की गई हैं।
निष्कर्ष
चक्रवात ‘मोंथा’ की स्थिति को देखते हुए, सभी नागरिकों को सावधानी बरतने और सरकार के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। यह समय संकट प्रबंधन और सामुदायिक सहयोग का है, ताकि इस प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।
अंत में, सभी संबंधित विभागों और नागरिकों को एकजुट होकर इस चक्रवात के प्रभाव का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। सही और समय पर जानकारी के माध्यम से हम सब मिलकर इस चुनौती का सामना कर सकते हैं।





