छठ पूजा 2025 से पहले भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में छठ गीतों की बौछार
जैसे-जैसे छठ पूजा का पर्व नजदीक आ रहा है, भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में छठ गीतों की बाढ़ आ गई है। इस पावन अवसर पर हर साल की तरह, इस बार भी नए-नए छठ गीतों का अनावरण हो रहा है। ये गीत न केवल भक्तों के लिए श्रद्धा का प्रतीक हैं, बल्कि भोजपुरी संस्कृति की समृद्धि का भी परिचायक हैं।
इस वर्ष, माही श्रीवास्तव का नया छठ गीत यूट्यूब पर रिलीज हो चुका है, जो कि दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। माही की आवाज़ में छठ की महक और धार्मिक भावनाएँ सुनाई देती हैं, जो सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। छठ पूजा के इस महापर्व पर माही का यह गीत भक्तों के बीच विशेष स्थान बना रहा है।
छठ पूजा का महत्व और गीतों की भूमिका
छठ पूजा सूर्य देव और छठ माता की पूजा का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। यह पूजा चार दिनों तक चलती है और इसमें श्रद्धालु व्रत रखते हैं, विशेषकर महिलाएँ। इस अवसर पर गाए जाने वाले गीतों का विशेष महत्व होता है, जो भक्तों की भावना को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।
छठ गीतों में भक्ति, श्रद्धा और संस्कृति का अद्भुत मेल होता है। ये गीत सूर्य देवता की स्तुति में गाए जाते हैं और इस पर्व की विशेषता को दर्शाते हैं। माही श्रीवास्तव जैसे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए ये गीत व्रतधारियों को और अधिक प्रेरित करते हैं।
नए छठ गीतों की सूची
- माही श्रीवास्तव का नया छठ गीत
- पवन सिंह का छठ गीत “सूर्य देवता की महिमा”
- काजल राघवानी का “छठी मईया के गीत”
- आदित्य नारायण का “छठ का त्योहार”
- शिवानी सिंह का “नया छठ गीत”
इन गीतों में न केवल भक्ति का भाव है, बल्कि ये भोजपुरी संस्कृति की गहराई को भी दर्शाते हैं। हर गीत में एक अलग कहानी और भावना होती है, जो व्रत के दौरान श्रद्धालुओं को प्रेरित करती है। यह गीत सभी उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।
छठ पूजा का आयोजन और उसके दौरान की परंपराएँ
छठ पूजा का आयोजन विशेष रूप से दीपावली के बाद आता है। इस पूजा में व्रति महिलाएँ विशेष धारणाएँ करती हैं और अपने-अपने घरों में स्वच्छता का ध्यान रखती हैं। इस दौरान खाने-पीने की विशेष चीज़ों का भी महत्व होता है।
पूजा के चार दिनों में, पहला दिन नहाय-खाय होता है, जिसमें व्रति महिलाएँ स्नान करती हैं और विशेष व्यंजन तैयार करती हैं। दूसरे दिन, खरना का आयोजन होता है, जहाँ महिलाएँ दिनभर उपवास रखकर रात में विशेष पूजा करती हैं। तिसरे दिन, सूर्यास्त के समय, छठ माता की पूजा होती है। और अंतिम दिन, सूर्योदय के समय, सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाता है।
भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री और छठ पूजा
भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में छठ गीतों का एक अलग स्थान है। ये गीत न केवल धार्मिकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि भोजपुरी संस्कृति को भी जीवित रखते हैं। समय के साथ-साथ म्यूजिक इंडस्ट्री ने छठ गीतों को एक नई पहचान दी है। आजकल के युवा कलाकार भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और नए रंग-रूप में इन गीतों का प्रस्तुतिकरण कर रहे हैं।
माही श्रीवास्तव जैसे कलाकारों की मेहनत और लगन से भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री का यह हिस्सा और भी मजबूत हो रहा है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी नए और सुंदर छठ गीत सुनने को मिलेंगे, जो इस पावन पर्व की गरिमा को और बढ़ाएंगे।





