Alliance में हलचल: बिहार की महत्वपूर्ण सीट पर साथी बने प्रतिद्वंद्वी

Summary

बिहार में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बढ़ती तनाव बिहार में महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे के विवाद के कारण तनाव बढ़ता जा रहा है। इस गतिरोध के चलते कई निर्वाचन क्षेत्रों में सहयोगी पार्टियों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन में दरारें साफ…

Alliance में हलचल: बिहार की महत्वपूर्ण सीट पर साथी बने प्रतिद्वंद्वी

बिहार में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बढ़ती तनाव

बिहार में महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे के विवाद के कारण तनाव बढ़ता जा रहा है। इस गतिरोध के चलते कई निर्वाचन क्षेत्रों में सहयोगी पार्टियों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन में दरारें साफ नजर आ रही हैं।

महागठबंधन में शामिल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और अन्य छोटे सहयोगियों ने एकजुटता का लक्ष्य रखा था। लेकिन सीटों के वितरण को लेकर मतभेदों ने आंतरिक प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है, जिसके चलते कई निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों के बीच प्रतिकूल उम्मीदवार खड़े हो गए हैं।

विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिकूल उम्मीदवारों की सूची

यहाँ कुछ प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों की सूची दी गई है जहाँ गठबंधन के साझेदार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं:

  • वैशाली: कांग्रेस के संजीव कुमार और राजद के अजय कुशवाहा आमने-सामने हैं। वैशाली जिले में स्थित यह सीट महागठबंधन के लिए रणनीतिक महत्व रखती है, जहाँ दोनों पार्टियों का मजबूत प्रभाव होने का दावा है।
  • लालगंज विधानसभा सीट: राजद ने शिवानी शुक्ला को टिकट दिया है, जो मजबूत नेता मुन्ना शुक्ला की बेटी हैं, जबकि कांग्रेस ने आदित्य कुमार राजा को मैदान में उतारा है।
  • राजापाकड़ विधानसभा सीट: यहां कांग्रेस की प्रतिमा दास का मुकाबला सीपीआई-मार्क्सवादी के मोहित पासवान से है। वामपंथी पार्टी ने इस सीट को अपने 20 उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है, जबकि कांग्रेस ने इसे प्राथमिकता दी है।
  • बछवाड़ा सीट: समस्तीपुर जिले में सीपीआई-मार्क्सवादी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच टकराव हो रहा है। दोनों ने नामांकन दाखिल किया है।
  • गौरा बौराम विधानसभा सीट: दरभंगा जिले से वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को पहले इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए नामित किया गया था, लेकिन बाद में पार्टी के उम्मीदवार को टिकट दे दिया गया। राजद ने भी अपना उम्मीदवार खड़ा किया है।
  • रोसरा सीट: समस्तीपुर से राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार फिर से आमने-सामने हैं।
  • बिहार शरीफ सीट: कांग्रेस ने उमर खान को नामित किया है और सीपीआई के सतीश यादव ने विवाद को और बढ़ा दिया है। इस सीट पर मुस्लिम-यादव मतदाता आधार है, और एनडीए इसे गठबंधन की आंतरिक दरार का प्रतीक बता रहा है।
  • काहलgaon सीट: भागलपुर जिले में दूसरे चरण के मतदान में यह सीट शामिल है। यहां राजद के राजनिश यादव कांग्रेस के प्रवीण कुमार कुशवाहा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

गठबंधन में आंतरिक मतभेदों का प्रभाव

महागठबंधन में यह आंतरिक मतभेद न केवल चुनावी रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि इससे मतदाता के बीच भ्रम भी उत्पन्न हो रहा है। जब सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, तो यह उनकी एकजुटता पर सवाल उठाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे गठबंधन की छवि को नुकसान हो सकता है और इसका सीधा प्रभाव मतदान के परिणामों पर पड़ सकता है।

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच, यह स्थिति महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझाया गया, तो इससे गठबंधन के वोट बैंक में कमी आ सकती है। अब देखना यह है कि गठबंधन के नेता इस संकट का समाधान कैसे निकालेंगे और क्या वे एकजुटता के साथ चुनावी मैदान में उतर पाएंगे।

निष्कर्ष

बिहार में महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद ने एक नई राजनीतिक स्थिति उत्पन्न कर दी है। गठबंधन के नेताओं को अब प्राथमिकता के साथ इन मुद्दों को सुलझाना होगा ताकि वे एक मजबूत और प्रभावी चुनावी अभियान चला सकें। बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में यह घटनाक्रम न केवल गठबंधन बल्कि विपक्ष के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।