Crime: यूपी में 8 साल की बच्ची का रेप-मर्डर, दोषी को उम्रकैद

हमीरपुर में मासूम के साथ दुष्कर्म के मामले में सुनवाई जागरण संवाददाता, हमीरपुर। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट कीर्तिमाला सिंह ने एक बेहद संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए आरोपित को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला उस समय की है जब एक आठ वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म किया गया और उसके बाद उसकी…

Crime: यूपी में 8 साल की बच्ची का रेप-मर्डर, दोषी को उम्रकैद

हमीरपुर में मासूम के साथ दुष्कर्म के मामले में सुनवाई

जागरण संवाददाता, हमीरपुर। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट कीर्तिमाला सिंह ने एक बेहद संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए आरोपित को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला उस समय की है जब एक आठ वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर शव को जलाने का प्रयास किया गया। न्यायालय ने आरोपित पर 39 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से 80 प्रतिशत राशि मृतका के परिवार को देने का आदेश दिया गया है।

घटनाक्रम की शुरुआत

मामला 26 जून 2020 का है, जब मौदहा थाना क्षेत्र के एक मुहल्ले में वादिनी ने कोतवाली में तहरीर दी थी। वादिनी ने बताया कि उस दिन उसकी पुत्री उसके साथ चारपाई पर सोई हुई थी। रात करीब ढाई बजे जब उसने जागकर देखा, तो उसकी बच्ची चारपाई से गायब थी। इस पर उसने अपने स्वजन को जगाकर सूचना दी और सभी ने मिलकर बच्ची की तलाश शुरू की।

पुलिस की जांच और सबूत

जब परिवार के सदस्यों ने आस-पास के क्षेत्र में बच्ची को खोजने की कोशिश की, लेकिन बिना किसी परिणाम के, उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। इसी दौरान पड़ोसियों ने पुलिस को 26 जून 2020 को सूचना दी कि एक घर से जलने की गंध आ रही है।

आरोपित का कबूलनामा

पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो उन्होंने देखा कि वहां जली हुई राख, हड्डियाँ, बच्ची के पैर के छल्ले, चाकू और तावा जैसे सबूत मिले। इसके बाद पुलिस ने कानपुर की फोरेंसिक टीम को बुलाकर मौके की जांच करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान, अभियुक्त संतोष कोरी पुत्र राजाराम कोरी ने सबके सामने अपने गुनाह को कबूल करते हुए कहा कि उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे चाकू से टुकड़े कर जलाने की कोशिश की।

अदालत में सुनवाई और सजा

जांच अधिकारी ने मामले को अदालत में पेश करते हुए चार्जशीट दाखिल की। शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने संतोष कोरी को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 39 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि मृतका के स्वजन को दी जाए।

समाज में सुरक्षा के मुद्दे

इस घटना ने समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे मामलों में कड़ी सजा देने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के जघन्य अपराध करने का साहस न कर सके। विशेष न्यायाधीश की यह सजा उन सभी के लिए एक सख्त संदेश है जो बच्चों के खिलाफ अपराध करने की सोचते हैं।

समाज की जिम्मेदारी

समाज में ऐसे मामलों को रोकने के लिए हमें एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। सभी नागरिकों को अपने आस-पास की गतिविधियों पर नज़र रखनी चाहिए और यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। इसके साथ ही, बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना और उनके प्रति जागरूकता फैलाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

इस मामले में न्यायपालिका ने सख्त कदम उठाते हुए यह साबित कर दिया है कि वह इस प्रकार के जघन्य अपराधों के प्रति गंभीर है। हमीरपुर की घटना से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि समाज को जागरूक रहने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे जघन्य अपराधों को रोका जा सके।

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