उत्तर प्रदेश: बंदरों के आतंक से वृद्धा की मौत
जागरण संवाददाता, जौनपुर। जौनपुर के पक्का पोखरा मोहल्ले में शनिवार सुबह एक दुखद घटना में 72 वर्षीय राजकुमारी की सीढ़ी से गिरने के कारण मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, राजकुमारी अपने दामाद के घर पर रह रही थीं और छत पर धूप सेंकने के लिए गई थीं। अचानक छत पर आए बंदरों के झुंड को देखकर वह घबरा गईं और सीढ़ियों की ओर भागने लगीं। इसी दौरान उनकी साड़ी छत पर निकली लोहे की सरिया में फंस गई, जिससे वह अनियंत्रित होकर सीढ़ी से गिर गईं।
स्वजन ने उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने उनके परिवार में गहरा शोक छा दिया है। राजकुमारी की केवल एक बेटी थी, और इस दुखद घटना ने उनके घर में मातम का माहौल बना दिया है। पुलिस ने मामले की जानकारी मिलते ही विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
बंदरों के आतंक से परेशान स्थानीय नागरिक
शाहगंज : जौनपुर नगर में इन दिनों बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। पिछले दस दिनों से लगभग 50 की संख्या में आए इन बंदरों ने स्थानीय नागरिकों को परेशान कर रखा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने और छतों पर जाने से डरने लगे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए नागरिकों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
बंदरों के उत्पात से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। कई लोग छतों पर जाकर काम करने में भी असमर्थ हैं। कई बार बंदरों ने लोगों पर हमला भी किया है, जिससे डर और बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को इस समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए ताकि उन्हें इस डर से राहत मिल सके।
बंदरों की बढ़ती संख्या का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण और पर्यावरणीय परिवर्तन के कारण बंदरों की संख्या में वृद्धि हुई है। जौनपुर जैसे शहरों में जहां विकास हो रहा है, वहां वन्य जीवों का स्थान छिन रहा है। इसके परिणामस्वरूप बंदर शहरों में आने लगे हैं।
बंदरों द्वारा उत्पात मचाने के कई कारण हैं, जैसे:
- खाद्य स्रोतों की कमी
- पर्यावरणीय बदलाव
- शहरीकरण के कारण प्राकृतिक आवास का नष्ट होना
स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी
इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस समस्या का समाधान निकालें। नागरिकों ने सुझाव दिया है कि:
- बंदरों की घेराबंदी कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए।
- बंदरों के लिए खाद्य स्रोतों की व्यवस्था की जाए ताकि वे शहर में न आएं।
- स्थानीय निवासियों को जागरूक किया जाए कि वे बंदरों के प्रति सजग रहें।
साथ ही, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि वे जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। खासकर बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस तरह की घटनाएं समाज में चिंता का विषय बन गई हैं और प्रशासन को इन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
जौनपुर में राजकुमारी की दुखद मौत ने सभी को झकझोर दिया है। यह घटना न केवल व्यक्तिगत दुख है, बल्कि यह एक सामाजिक समस्या की ओर भी इशारा करती है। बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण नागरिकों की सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है। इस मामले में प्रशासन का त्वरित और प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और नागरिकों को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर मिल सके।





