Ayodhya: FIR कॉपी न मिलने पर अयोध्या बार एसोसिएशन की पुलिस को चेतावनी

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अयोध्या: भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या एक बार फिर से सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह आस्था नहीं, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का गंभीर मामला है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने साफ तौर पर चेतावनी दी…

अयोध्या में गरमाया राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: वकीलों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

अयोध्या: भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या एक बार फिर से सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह आस्था नहीं, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का गंभीर मामला है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनकी तहरीर पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई, तो अयोध्या के अधिवक्ता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय वकीलों ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि तीन दिन बाद वे स्वयं थाने जाकर FIR की कॉपी की मांग करेंगे। यदि तब तक पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो वकीलों का गुस्सा अयोध्या की सड़कों पर स्पष्ट दिखाई देगा, जिससे शहर की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर लगे हैं गंभीर आरोप

अयोध्या बार एसोसिएशन द्वारा दी गई तहरीर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का नाम प्रमुखता से लिया गया है। वकीलों का आरोप है कि मंदिर के चढ़ावे में बड़ी धांधली हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, अब तक अयोध्या पुलिस ने इन रसूखदार नामों के खिलाफ मामला दर्ज करने से परहेज किया है, जिसे लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है।

अधिवक्ताओं का एक बड़ा वर्ग इस मामले में सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि यह मामला सीधे तौर पर करोड़ों राम भक्तों की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान से जुड़ा है, इसलिए इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करना पुलिस और प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है।

बार एसोसिएशन का कड़ा रुख: आरोपी का केस लड़ने पर आजीवन सदस्यता खत्म

बीते सोमवार (29 जून) को आयोजित अयोध्या बार एसोसिएशन की आपातकालीन बैठक में एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया गया। एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी भी आरोपी का पक्ष कोई भी वकील नहीं रखेगा। यदि कोई अधिवक्ता इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

बैठक में लिए गए फैसलों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • बहिष्कार का निर्णय: मंदिर चढ़ावा गबन मामले के किसी भी आरोपी का कोई भी वकील मुकदमा नहीं लड़ेगा।
  • भारी जुर्माना: यदि कोई वकील आरोपियों का केस लड़ता पाया गया, तो उस पर 5 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।
  • सदस्यता पर कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिवक्ता की बार एसोसिएशन से आजीवन सदस्यता तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी।
  • अयोध्या छोड़ने की मांग: वकीलों ने मांग की है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तत्काल प्रभाव से अयोध्या छोड़ देना चाहिए।

आंदोलन की राह पर वकील, प्रशासन पर दबाव

एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह मामला केवल पैसों का नहीं, बल्कि मर्यादा का है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर संबंधित आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा अयोध्या शहर जाम कर दिया जाएगा। वकीलों के इस रुख ने स्थानीय प्रशासन की बेचैनी बढ़ा दी है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे ने हलचल मचा दी है। विपक्ष लगातार सत्ताधारी दल पर हमलावर है और राम मंदिर के चढ़ावे की पवित्रता को लेकर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, बार एसोसिएशन ने यह भी निर्णय लिया है कि वे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए अदालत में याचिका भी दाखिल करेंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस अगले तीन दिनों में कोई बड़ा कदम उठाएगी या अयोध्या का यह कानूनी विवाद और अधिक तूल पकड़ेगा।

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