पन्ना के बृहस्पति कुंड में फिर पसरा मातम: बिहार के नर्सिंग छात्र की डूबने से मौत, 36 घंटे बाद मिला शव
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित पन्ना जिले का प्रसिद्ध बृहस्पति कुंड जलप्रपात एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई प्राकृतिक सौंदर्य नहीं बल्कि एक दिल दहला देने वाला हादसा है। अपनी मनमोहक सुंदरता और ऊंचाई से गिरते पानी के लिए मशहूर यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में यह अब ‘मौत का कुंड’ बनता जा रहा है। हाल ही में बिहार के समस्तीपुर से आए एक नर्सिंग छात्र की यहां डूबने से दर्दनाक मौत हो गई, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय कुणाल ठाकुर अपने दोस्तों के साथ बृहस्पति कुंड की खूबसूरती देखने आए थे। हादसे के दिन कुणाल कुंड के पास चट्टानों पर चल रहे थे, तभी अचानक उनका पैर फिसल गया और वे सीधे गहरे पानी में जा गिरे। कुणाल के साथ मौजूद दोस्तों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन कुंड की गहराई और पानी के तेज बहाव के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। देखते ही देखते कुणाल पानी की गहराइयों में ओझल हो गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
36 घंटे का लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की सुस्ती
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल को सूचित किया गया, लेकिन घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्यों में भारी सुस्ती देखी गई। सतना और पन्ना की सीमा पर स्थित होने के कारण अधिकार क्षेत्र को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रही, जिसका खामियाजा पीड़ित परिवार को भुगतना पड़ा। आखिर में पन्ना की रेस्क्यू टीम ने मोर्चा संभाला और अपनी जान जोखिम में डालकर पानी के अंदर तलाशी अभियान शुरू किया। करीब 36 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कुणाल का शव बरामद किया जा सका।
कुणाल ठाकुर बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले थे और उनके पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है, क्योंकि कुणाल अपने माता-पिता का लाडला बेटा था और नर्सिंग की पढ़ाई कर अपना करियर संवारने की कोशिश में था। उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेस्क्यू अभियान समय रहते शुरू हो जाता, तो शायद परिणाम कुछ और हो सकते थे।
पर्यटन स्थल या मौत का जाल? सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बृहस्पति कुंड में होने वाली यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार पर्यटक यहां अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद, प्रशासन ने इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया है।
- सुरक्षा घेरे का अभाव: कुंड के चारों ओर कोई मजबूत बैरिकेडिंग नहीं है, जिससे पर्यटक अनजाने में गहरे पानी के करीब पहुंच जाते हैं।
- चेतावनी बोर्ड की कमी: खतरनाक स्थानों पर कोई भी चेतावनी संकेत या बोर्ड नहीं लगे हैं, जिससे पर्यटकों को खतरे का अंदाजा नहीं हो पाता।
- प्रशासनिक उदासीनता: सतना और पन्ना जिला प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सके हैं।
- लाइफगार्ड्स की अनुपस्थिति: पर्यटन सीजन के दौरान भी यहां किसी भी प्रकार के गोताखोर या लाइफगार्ड्स तैनात नहीं किए जाते हैं।
बृहस्पति कुंड की अनुपम छटा पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है, लेकिन यह खूबसूरती अब जानलेवा साबित हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही सुरक्षा इंतजामों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसे दुखद हादसों को रोक पाना नामुमकिन होगा। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम जिंदगियां इन चट्टानों और गहरे पानी की भेंट चढ़ती रहेंगी? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य के लिए क्या सुरक्षा योजनाएं बनाता है।
